top of page
  • Facebook
  • Twitter

कुसुम-कली

  • Writer: Mast Culture
    Mast Culture
  • Oct 9, 2025
  • 1 min read

By Sangeeta Digvijay Singh


हे जननी,

कुसुम-कली को धरती के प्रांगण में आने दो,

खग-विहग के कलरव ध्वनि सुनकर हर्षाने दो,

कोकिला जैसी कुहुँ-कुहुँ मधुर गीत गाने दो,

सावन के मेघा में मयूरी बनाकर नृत्य करने दो,

रंग-बिरंगी तितली बनकर कल्पना की उड़ान भरने दो,

 कली को पूर्ण बनकर धरा को हृदय से नमन करने दो ।


 किस व्यथा से जूझ रही हो?

भयभीत व संवेदनहीन होकर,

 प्रतिपल अपने ही स्वरूप को मार रही हो ।

 सामाजिक कुरीतियों में फंसकर,

अपने ही बाग की डाली काटने की सोच रही हो,

 कुल दीपक की प्रचंड चाह में झांसी की रानी, इंदिरा, किरण बेदी, लता मंगेशकर जैसी राष्ट्र की ज्योति-पुंज को आने से रोक रही हो ।


हे जननी,महिषासुर रूपी बुराइयां कन्या-भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, लिंग के आधार पर भेदभाव,बलात्कार इन सब बुराइयों के जड़ में प्रहार करना होगा,

सोच बदलना होगा,कलुषित मानसिकता से लड़ना होगा।


अर्ध -निद्रा में विद्रोही-स्वर से चिखती-चिल्लाती माँ, ज्योति को कोख में ना मारूंगी ।

राष्ट्रीय ज्योति-पुंज अब प्रस्फुटित होकर,

मेरे घर-अंगना में कुसुम-पुष्प बनकर आएगी


By Sangeeta Digvijay Singh


Recent Posts

See All
Kulam Kulam Ane Kakulam

By Gudimella D N G Bhavani కులం కులం అనే కాకులం కులం నిలువదు‌రా ఎ‌ల్లకాలం కులం వదిలి ,పట్టరా క‌‌లం అప్పుడే కాగలవు అబ్దుల్ కలాం... కులం...

 
 
 
Kulam Kulam Ane kakulam

By Gudimella D N G Bhavani kulam kulam ane kakulam kulam niluvadhuraa yellakalam kulam vadhili pattaraa kalam appude kagalavu abdul kalam...

 
 
 
लाहौर

By Tejeshwar Singh मुझे अब खामोशी से जीना आ गया तेरी तसवीर से बात करना आ गया आँसू बगावत पर उतर आएं है मेरे मुझे अब वक्त से लड़ना आ गया ...

 
 
 

Comments


bottom of page