उठो पार्थ , लढो , युद्ध करो !
- Mast Culture

- Jul 7, 2025
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By Kedar Sambhaji Atigre
जब कुरुक्षेत्र के युद्ध से पहले ही अर्जुन उदास होता है ,तो भगवान श्री कृष्ण उसे कहते है.
उठो पार्थ , लढो , युद्ध करो !
जाग लो वीर पार्थ तुम्हे
अब मै जगाने आया हूँ
अधर्म के इस कुरुक्षेत्र में
धर्म बताने आया हूॅ
देखो , कौन है तुम्हारे आगे
जिनको अपना मानते हो
सखा बंधु जन परिजन
क्या सबको पहचानते हो?
दोष किसका क्या है
क्या कितना जानते हो
अपने मन ही मन में तुम
पाप पुण्य सब मानते हो
सुनो पार्थ...
मत करना भ्रम मन में
के मै हि सब करता हूं
क्या हुवा तुमसे अब तक
यह मै तुम्हे बतलाता हूं
मै भी था , तुम भी थे
आदि अनादि काल से
सब जन थे इस संसार में
कौन चुका है माया जाल से
कुछ नहीं हुवा है तुमसे
न होगा कुछ आगे से
मै ही सब करवाता हूं
अपने रचाए जाल से
घमंड से चूर , परम कठोर
दशानन रावण का संहार किया
त्रेता का मै राम बनकर
कितनोंका उद्धार किया
जन्म से ही कठिणायोंसे
मै जितता आया हूं
कंस , चाणूर का वध करके
देवकी नंदन कहलाया हूं
क्या वह नहीं थे मेरे
मै क्या करता तुम बोलो
कष्ट ,दुःख से भाग जाता
या मर जाता तुम बोलो
नहीं होंगा मुझसे माधव
यह कैसे तुमने बोल दिया
सारी विपदाओं के खातीर
अपना संतुलन खो दिया
उठाओं शस्त्र और युद्ध करो
अपना कर्म करलो तुम
सुख दुःख , जय पराजय
सब समान अब मानलो तुम
विनाश करो अधर्म का
जो जिसने करवाया है
कौन चुकेगा , जो तुम छोडोगे
मैने पहलेसे ही मरवाया है
तुम क्या मुझे जानोगे अर्जुन
मै तो अटल अविनाशि हूं
जन्म से जाना है मुझे पर
मै पहलेसे सर्व व्यापी हूं
मै विष्णु हू, मै इन्द्र हू
मै वसु तथा मै ही रुद्र हू
मै सूर्य हू , मै चंद्र हू
मै ब्रम्हांड हू तथा मै उसिका तेज हू
मै सबकुछ हू या
ना समजने वाली मायां हू
मै सब चराचर में हू
या मै हू ही नही
मै तुझ मे भी हूं अर्जुन
तथा अधर्मी का अंत हू
मै ही सबको बचाता हू
और मै ही मरवाता हूं
सब मोह माया त्याग कर
अपना गांडीव उठालो तुम
संसार में नए धर्म का
ध्वज फिर से लहराओ तुम
तुझ मे भरपूर है शक्ती
क्या तुम यह नही जानते
क्यों अपनी ताकत को
तुम इतना कमजोर मानते
उठो लढो , युद्ध करो
हार जीत तो होनी है
धर्म की इस लढाई में
धर्म की ही जीत होनी है
मेरा आशिर्वाद है तुम्हे
न तुम कभी हारोगे
जितोगे सदा ही यदि
धर्म की बात मानोगे
शरण में आओ मेरे अर्जुन
मुझ में विलिन हो जाओ
विश्वयुद्ध की जीत लेकर
विजयी यशस्वी हो जाओ
समाप्त !
By Kedar Sambhaji Atigre



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