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यादों वाला सफ़र

  • Writer: Mast Culture
    Mast Culture
  • Jul 10, 2025
  • 1 min read

By Anushka Shah


ए मेरे यार, चल न कुछ करते हैं,

कुछ पुरानी यादें फिर से जीते हैं,

थोड़े नए लम्हे संग में बुनते हैं,

आज बचपन फिर से दोहराते हैं।


हम बड़े क्या हुए, दूरियाँ भी बढ़ गई,

चल न आज फिर से वही दोस्ती गढ़ते हैं,

इन फासलों को आज मिटा देते हैं,

फिर वो पुरानी यारी दोहराते हैं।


याद है तुझे, जब साथ रहा करते थे,

हँसते थे, गाते थे, खूब मस्ती करते थे,

इक साथ बैठ के फिल्में देखा करते थे,

चल आज फिर से वो सब करते हैं।


छोटी बातों पर लड़ना, फिर तुरंत मान जाना,

कभी बुराइयाँ, कभी दिल से अपनाना,

रूठना, मनाना और बात-बात पर मुस्कुराना —

चल न यार, वो बचपन फिर से अपनाना।


साथ में पढ़ना, पट्टे खेलना दिन भर,

थोड़ा बहुत चीटिंग कर लेना बेख़बर,

ब्रैसलेट बनाना, बीड्स चुराना,

याद है वो सब? चल उन्हें फिर से आजमाना।

वो ‘हम ये करेंगे, हम वो करेंगे’ की बातें,

वो अधूरे प्लान, अधूरी मुलाकातें,

घूमने के वादे, जो बस ख्वाब बन गए,

चल अब उन्हें हकीकत में बदलते हैं।


जो कभी ना किया, अब वो भी करते हैं,

जो किया था, चल फिर से दोहराते हैं,


आज सब कुछ भुला कर, बचपन फिर जीते हैं,

फिर से वही दस साल के बच्चे बनते हैं।

ए मेरे यार, चल न कुछ करते हैं…


By Anushka Shah

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