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स्वराज्य सम्राट

  • Writer: Mast Culture
    Mast Culture
  • Jul 9, 2025
  • 2 min read

By Suyash S. Gaikwad


थी महाराष्ट्र की दयनीय स्थिती,

दुष्ट राक्षसों से ग्रसित थे सब,

परदेस से आए दुष्ट कई,

पीडित थी जनता हमारी जब। 1


अभ्यर्थना सुनकर हमारी तब,

भवानी माता प्रसन्न हुई,

भेजा पुत्र अपना ऐसा,

जिसके सामने झुका हर कोई। 2


फालगुण महिना वाद्य तृतीया,

सताभीश मे सूर्य विराट,

पूना के शिवनेरी मे जल्लोश,

अवतरित हुए स्वराज्य सम्राट। 3


महाराष्ट्र के जुन्नर, पुणा मे,

जिजाऊ माता को है प्रणाम,

पुत्र को जिन्होंने जनम दिया,

महाराज शिवराय जिनका नाम। 4


शूरवीर शिवराय धरा पधारे,

भारत और हृदय पर करने राज,

रायरेश्वर भैरव को रक्त पिलाया,

तब जनम लीया हमारा स्वराज। 5


युद्ध नीति मे पारंगत थे सब,

शस्त्र - शास्त्र के थे ज्ञानी,

दादोजी की छत्रछाया और 

माता की कथाओं से सीख जानी। 6


उनका प्रथम निशाना बना तोरणा,

कोंढाना और राजगड बना अपना,

धीरे-धीरे राज्य बढता देख,

पूरा हो माता जिजाऊ का सपना। 7


तभी पिता शाहाजी कैद हुए,

बीजापुर के कारागार मे,

सारे अभियान पर लगी रोक,

अब क्या है शिवबा के विचार मे? 8


जावळी घाटी को कर लिया,

प्राप्त मोरे सरदारों से,

पश्चिम घाटी हुई आभारी,

महाराज, आपके इन उपकारों से। 9


जीता जागता राक्षस स्वयं,

अफ्झल खान जब आया जो,

आपको जिंदा या मुर्दा पकडूंगा,

ऐसी शपथ कर आया वो। 10


प्रतापगड के वाई मे,

था बना मिलनेका शामियाना,

उसकी छाती फाडकर दिया मृत्यू,

शाब्बास शिवबा! केला मोठा कारनामा। 11


बीजापुर दरबार काँप उठा,

बडी बेगम को हुई चिंता,

एक तूफान आया हफ्ते पश्चात,

जला गया बीजापुर की चिता। 12


पाच महीने पन्हाला पर,

महाराज थे कैदी वहा,

सिद्दी जोहर के आतंक से,

खाना-पाणी की मंदी वहा। 13


मध्यरात्री पन्हाला से,

तैर हुआ विशालगड जाना,

बाजी प्रभू देशपांडे की वीरता को,

सदा केलिए जग ने जाना। 14


मुग़ल बादशाह औरंगज़ेबने,

भेजा जो शाइस्ता खान को,

पूणा को पकडा जो उसने,

ठेस पोहची माता के सम्मान को। 15


मध्यरात्री,

बारात का ढोंग बनाकर,

लाल महल को शिवराय पोहचे,

शाइस्ता खान को मार भगाया,

बस, बगैर तीन उंग्ली के। 16


मुख्य केंद्र था औरंग का

सूरत था व्यापार की मूरत,

एक हफ्ते मे बदलदी आपने,

मुग़ल और सूरत की सूरत। 17


संगीन था पुरंदर का,

संधि का प्रस्ताव बडा,

कुछ गढ गए, कुछ बचालीए,

ये कैसा संकट हुआ खडा। 18


महाराज और युवराज को,

आग्रा औरंग ने बुलवाया,

समझौता करना था बहाना,

महाराज को बंधी बनवाया। 19


बच निक्ले मुनिवेष मे,

पन्हाला पर रुके युवराज,

महाराज सुरक्षित पोहचे राजदड,

पुनः प्रफुल्लित हुआ स्वराज। 20


पुरंदर और अन्य किल्ले,

महाराज ने प्राप्त कीए

कोंढाणा सिंहगड नामकरण हुआ,

नौ सेना को अद्भुत है कीए। 21


फिर आया वह स्वर्ण दिवस,

श्री गणेश की कृपा जब बरसी थी,

स्वराज को मिला अपना प्रथम छत्रपती,

जिनके लिए भारत माता तरसी थी। 22


माँ-बहनों की इज्जत जब,

बन गया एक चिंता की विषय

सम्मान आपने लौटाया वापस,

आशिर्वाद हो आपका अक्षय। 23


माता समान प्रेम करे जो,

पिता समान ध्यान रखता है,

हर एक मावले को भाई कहे,

वो तो बस शिवबा हो सकता है। 24


By Suyash S. Gaikwad

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